महिलाओं में मोटापा: कारण और समाधान

क्या आप अपनी पसंदीदा पुरानी ड्रेस में फिट होने के लिए संघर्ष कर रही हैं, या फिर सुबह उठते ही आपको बिना किसी कारण के थकान और भारीपन महसूस होता है? भारतीय समाज में महिलाओं के लिए वजन बढ़ना अक्सर केवल सुंदरता से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन एक विशेषज्ञ के नज़रिए से यह PCOD, थायराइड और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती चेतावनी है। महिलाओं में मोटापा: कारण और समाधान को समझना आज के समय में केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक ज़रूरत बन गया है क्योंकि आपकी सेहत ही आपके परिवार की खुशहाली की नींव है।

इसका छोटा सा जवाब यह है कि महिलाओं में मोटापा मुख्य रूप से हार्मोनल बदलाव (PCOS/थायराइड), असंतुलित भारतीय आहार (अत्यधिक कार्ब्स), और गतिहीन जीवनशैली के कारण बढ़ता है। इसका प्रभावी समाधान पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित भारतीय आहार, नियमित शारीरिक सक्रियता (जैसे घर पर योग या वॉक), पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन के वैज्ञानिक मेल में छिपा है।

महिलाओं में मोटापा: कारण और समाधान

भारतीय महिलाओं में मोटापे की वर्तमान स्थिति और सांख्यिकीय विश्लेषण

भारत में महिलाओं के बीच मोटापे की समस्या एक ‘साइलेंट एपिडेमिक’ या छिपी हुई महामारी का रूप ले चुकी है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि पिछले दो दशकों में महिलाओं में मोटापे की दर लगभग दोगुनी हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की आयु की लगभग 24% भारतीय महिलाएं अब अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आती हैं, जबकि NFHS-4 में यह आंकड़ा 21% था।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच का अंतर भी काफी चौंकाने वाला है। शहरी क्षेत्रों में रहने वाली लगभग 33% महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 20% है। यह अंतर सीधे तौर पर आधुनिक जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड की बढ़ती उपलब्धता और शारीरिक श्रम में कमी को दर्शाता है। विशेष रूप से, दक्षिण भारतीय राज्यों और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में मोटापे की व्यापकता राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक देखी गई है।

राज्य/क्षेत्र (State/Region)महिलाओं में मोटापे की दर (Obesity Rate in Women)
दिल्ली (Delhi)33%
पंजाब (Punjab)31%
तमिलनाडु (Tamil Nadu)29%
केरल (Kerala)25%
आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh)23%
हरियाणा (Haryana)24%

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में हर 8 में से 1 व्यक्ति मोटापे के साथ जी रहा है। भारत में यह स्थिति इसलिए भी जटिल है क्योंकि यहाँ ‘एशियन इंडियन फिनोटाइप’ (Asian Indian Phenotype) देखा जाता है। इसका मतलब है कि भारतीय महिलाओं में बॉडी मास इंडेक्स (BMI) कम होने के बावजूद शरीर में वसा का प्रतिशत, विशेष रूप से पेट की चर्बी (Visceral Fat), बहुत अधिक होता है।

महिलाओं में मोटापा बढ़ने के मुख्य लक्षण और पहचान

मोटापे की पहचान केवल वजन तौलने वाली मशीन से नहीं होती। इसके कई सूक्ष्म लक्षण होते हैं जिन्हें अक्सर महिलाएं नजरअंदाज कर देती हैं। चलिए इसे आसान बनाते हैं और उन संकेतों को समझते हैं जो आपके शरीर के बढ़ते वजन की ओर इशारा करते हैं।

सबसे प्रमुख लक्षण है कमर के घेरे का बढ़ना। यदि आपकी कमर का माप 80 सेमी (लगभग 31.5 इंच) से अधिक है, तो यह ‘एब्डोमिनल ओबेसिटी’ का संकेत है। इसके अलावा, सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, जोड़ों में दर्द रहना, और गर्दन या बगल के आसपास की त्वचा का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans) इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षण हो सकते हैं, जो मोटापे से जुड़ा है।

नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आप अपनी स्थिति का आकलन कर सकती हैं:

श्रेणी (Category)BMI (kg/m²) – एशियन मानककमर का माप (Waist Circumference)
सामान्य वजन 18.5 – 22.9< 80 सेमी (महिला)
अधिक वजन 23.0 – 24.980 – 85 सेमी
मोटापा ≥ 25.0> 85 सेमी

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारतीयों के लिए BMI की सीमाएं वैश्विक मानकों से कम होनी चाहिए क्योंकि हमारे शरीर में मेटाबॉलिक रिस्क कम वजन पर ही शुरू हो जाता है।

महिलाओं में मोटापा के मुख्य कारण: एक विस्तृत समीक्षा

महिलाओं का शरीर जैविक और हार्मोनल रूप से पुरुषों से अलग होता है, जिसके कारण उनके वजन बढ़ने के कारण भी अधिक जटिल होते हैं। महिलाओं में मोटापा: कारण और समाधान को समझने के लिए हमें इन कारणों की तह तक जाना होगा।

1. हार्मोनल असंतुलन और मोटापा

हार्मोन हमारे शरीर के मैनेजर की तरह होते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो वजन बढ़ना स्वाभाविक है। भारतीय महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS/PCOD) एक बहुत ही सामान्य समस्या बन गई है, जो लगभग 10% से 22% महिलाओं को प्रभावित करती है। PCOS के कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा होता है, जिससे शरीर ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने के बजाय वसा के रूप में जमा करने लगता है।

थायराइड की समस्या, विशेष रूप से हाइपोथायरायडिज्म, महिलाओं में चयापचय (Metabolism) को काफी धीमा कर देती है। 2 जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती, तो शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे बिना ज्यादा खाए भी वजन बढ़ने लगता है।

2. एशियन इंडियन फिनोटाइप और जेनेटिक्स

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि भारतीयों में ‘एब्डोमिनल ओबेसिटी’ (Abdominal Obesity) या पेट का मोटापा होने की संभावना अधिक होती है। इसे “थिन-फैट इंडियन्स” (Thin-Fat Indians) भी कहा जाता है, जहाँ हाथ-पैर पतले दिख सकते हैं लेकिन पेट के आसपास वसा का जमाव अधिक होता है। ICMR-INDIAB अध्ययन के अनुसार, भारतीय महिलाओं में पेट के मोटापे की व्यापकता 31.2% है। यह आंतरिक वसा न केवल वजन बढ़ाती है, बल्कि हृदय रोगों और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को भी बढ़ा देती है।

3. दोषपूर्ण भारतीय आहार और पोषण की कमी

आधुनिक भारतीय रसोई में पारंपरिक पोषण की जगह प्रोसेस्ड और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स ने ले ली है। औसतन भारतीय घर अपनी कुल कैलोरी का लगभग 47% हिस्सा अनाज (सफेद चावल या मैदा) से प्राप्त करते हैं, जबकि प्रोटीन का हिस्सा केवल 6-8% ही है। प्रोटीन की यह कमी मांसपेशियों (Muscle Mass) को कम करती है और मेटाबॉलिक रेट को गिरा देती है। इसके अलावा, अत्यधिक तेल, चीनी और बाहर के जंक फूड का सेवन वजन बढ़ाने का मुख्य कारण है।

4. जीवनशैली और शारीरिक निष्क्रियता

आज की डिजिटल दुनिया में शारीरिक गतिविधियों में भारी कमी आई है। एक ICMR अध्ययन के अनुसार, लगभग 63% भारतीय महिलाएं शारीरिक रूप से निष्क्रिय हैं। घर के कामों में मशीनों के बढ़ते उपयोग और डेस्क जॉब्स की वजह से कैलोरी बर्न करने के मौके कम हो गए हैं। नींद की कमी और तनाव भी वजन बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं, क्योंकि ये स्ट्रेस हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ को बढ़ाते हैं, जो वसा संचय को प्रेरित करता है।

पीसीओएस (PCOS) में वजन घटाने का डाइट चार्ट और सावधानियां

PCOS के साथ वजन घटाना एक कठिन चुनौती लग सकती है, लेकिन सही रणनीति के साथ यह पूरी तरह संभव है। यहाँ मुख्य लक्ष्य इंसुलिन की संवेदनशीलता को सुधारना और सूजन (Inflammation) को कम करना है।

आसान शब्दों में समझें तो, आपको ‘लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ (Low-GI) वाले खाद्य पदार्थों पर ध्यान देना चाहिए जो रक्त शर्करा को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं।

PCOS डाइट के मुख्य स्तंभ:

  • हाई फाइबर कार्ब्स: सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस, ओट्स, और मिलेट्स (ज्वार, बाजरा, रागी) का उपयोग करें।
  • लीन प्रोटीन: हर मील में पनीर, दालें, अंडे या सोया शामिल करें। यह मांसपेशियों को बनाए रखने में मदद करता है।
  • एंटी-इंफ्लेमेटरी मसाले: हल्दी, अदरक और दालचीनी का उपयोग करें। दालचीनी को “प्राकृतिक मेटफॉर्मिन” कहा जाता है क्योंकि यह इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करती है। 1
  • स्वस्थ वसा: बादाम, अखरोट और अलसी के बीज हार्मोनल संतुलन के लिए ज़रूरी हैं।
समय (Time)खाद्य पदार्थ (Food Items)
सुबह खाली पेटमेथी दाना पानी या दालचीनी की चाय + 5 भीगे बादाम
नाश्ता (Breakfast)मूंग दाल चीला सब्जियों के साथ या रागी डोसा
मिड-मॉर्निंगएक मौसमी फल (सेब, अमरूद या पपीता)
दोपहर का भोजन1 मिलेट रोटी + कटोरी भर दाल + हरी सब्जी + सलाद
शाम का नाश्ताभुने चने या मखाना + ग्रीन टी
रात का भोजनओट्स खिचड़ी या ग्रिल्ड पनीर/चिकन सब्जियों के साथ

सावधानी: PCOS में प्रोसेस्ड शुगर, मैदा और अत्यधिक डेयरी उत्पादों से बचना चाहिए क्योंकि ये हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकते हैं।

थायराइड में मोटापा कैसे कम करें: मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने के तरीके

थायराइड के मरीजों के लिए वजन घटाना केवल कैलोरी कम करने के बारे में नहीं है, बल्कि अपने मेटाबॉलिज्म को ‘रीसेट’ करने के बारे में है।

इसका आपके रोज़मर्रा के रूटीन में क्या मतलब है? इसका मतलब है कि आपको ऐसे पोषक तत्वों की ज़रूरत है जो थायराइड ग्रंथि को सहारा दें, जैसे कि सेलेनियम, जिंक और आयोडीन।

प्रभावी टिप्स:

  1. प्रोटीन का सेवन बढ़ाएं: प्रोटीन पाचन के दौरान अधिक ऊर्जा खर्च करता है, जिससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है।
  2. सहजन (Moringa) का उपयोग: सहजन की पत्तियां या फलियां थायराइड फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
  3. शक्ति प्रशिक्षण (Strength Training): वजन उठाना या रेजिस्टेंस बैंड का उपयोग करना मेटाबॉलिज्म को स्थायी रूप से बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है।
  4. ग्लूटेन और सोया पर नियंत्रण: कुछ महिलाओं में ये थायराइड की दवाओं के अवशोषण में बाधा डाल सकते हैं, इसलिए इनका सेवन सीमित रखें।

डिलीवरी के बाद पेट कम करने के तरीके: नई माताओं के लिए सुरक्षित गाइड

बच्चे के जन्म के बाद वजन कम करने की जल्दबाजी अक्सर नई माताओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। महिलाओं में मोटापा: कारण और समाधान के इस भाग में हम सुरक्षित रिकवरी की बात करेंगे।

मुझे पता है कि एक छोटे बच्चे के साथ समय निकालना आसान नहीं होता, लेकिन आपके शरीर को ठीक होने के लिए पोषण और समय दोनों की ज़रूरत है।

  • स्तनपान (Breastfeeding): यह प्राकृतिक रूप से प्रतिदिन 300-500 कैलोरी बर्न करने में मदद करता है।
  • पारंपरिक लेकिन स्वस्थ आहार: गोंद के लड्डू और अजवाइन का पानी पाचन में सुधार करते हैं और रिकवरी तेज करते हैं, लेकिन इन्हें सीमित मात्रा में लें।
  • हल्की गतिविधि: प्रसव के 6 सप्ताह बाद (डॉक्टर की सलाह पर) धीमी सैर और पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज शुरू करें।
  • हाइड्रेशन: पर्याप्त पानी पीना न केवल वजन घटाने में मदद करता है, बल्कि दूध की आपूर्ति भी बनाए रखता है।
पोषक तत्व (Nutrient)महत्व (Importance)स्रोत (Sources)
प्रोटीन (Protein)ऊतक मरम्मत और रिकवरीमूंग दाल, पनीर, अंडा, सोया
कैल्शियम (Calcium)हड्डियों की मजबूतीरागी, दूध, दही, हरी सब्जियां
आयरन (Iron)एनीमिया से बचावपालक, बाजरा, खजूर
ओमेगा-3 (Omega-3)मानसिक स्वास्थ्य और सूजन कम करनाअखरोट, अलसी, मछली

महिलाओं के लिए वजन घटाने वाले व्यायाम: बिना जिम जाए फिट रहें

कई महिलाओं के लिए जिम जाना मुमकिन नहीं होता। लेकिन अच्छी खबर यह है कि आप अपने घर की प्राइवेसी में भी शानदार परिणाम पा सकती हैं।

चलिए इसे आसान बनाते हैं… व्यायाम का मतलब केवल पसीना बहाना नहीं है, बल्कि अपने शरीर को गतिशील रखना है।

  1. 30-30-30 नियम: सुबह उठने के 30 मिनट के भीतर 30 ग्राम प्रोटीन खाएं और उसके बाद 30 मिनट की हल्की सैर (जैसे घर के आंगन या छत पर) करें। यह मेटाबॉलिज्म को ‘किक-स्टार्ट’ करने का एक बेहतरीन तरीका है।
  2. चेयर योगा (Chair Yoga): यदि आप ऑफिस में काम करती हैं या घुटनों में दर्द है, तो कुर्सी पर बैठकर किए जाने वाले ट्विस्ट और स्ट्रेचिंग भी पेट की चर्बी घटाने में मदद करते हैं।
  3. घरेलू वजन का उपयोग: पानी की भरी हुई बोतलें डम्बल की तरह काम कर सकती हैं। बाइसेप कर्ल्स और शोल्डर प्रेस मांसपेशियों को टोन करने के लिए अच्छे हैं।
  4. योगासन: सूर्य नमस्कार, भुजंगासन (Cobra Pose) और नौकासन विशेष रूप से पेट की मांसपेशियों के लिए प्रभावी हैं।

मोटापा घटाने के लिए आयुर्वेदिक उपाय और घरेलू नुस्खे

भारतीय आयुर्वेद में वजन प्रबंधन के लिए जड़ी-बूटियों और जीवनशैली के बदलावों का खजाना है। ये उपाय न केवल वजन कम करते हैं, बल्कि शरीर की शुद्धि (Detox) भी करते हैं।

  • त्रिफला चूर्ण (Triphala): यह तीन फलों (आंवला, हरड़, बहेड़ा) का मिश्रण है। रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ 1 चम्मच त्रिफला लेने से पाचन सुधरता है और पेट साफ रहता है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह तनाव और कोर्टिसोल लेवल को कम करता है, जो विशेष रूप से 30 की उम्र के बाद वजन बढ़ने का कारण होता है।
  • गुग्गुलु (Guggulu): यह शरीर में वसा के चयापचय (Fat Metabolism) को तेज करता है और थायराइड फंक्शन को सपोर्ट करता है।
  • जीरा-धनिया-सौंफ का काढ़ा: इन तीनों मसालों को रात भर भिगोकर सुबह इनका पानी पीने से शरीर की सूजन कम होती है और वाटर रिटेंशन (Water Retention) से राहत मिलती है।

30 की उम्र के बाद वजन कैसे घटाएं: मेटाबॉलिक चुनौतियों का सामना

30 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में मांसपेशियों का नुकसान (Muscle Loss) शुरू हो जाता है, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इसके अलावा, एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में बदलाव होने से पेट के आसपास चर्बी जमा होने लगती है।

महिलाओं में बढ़ता वजन रोकने के टिप्स (30+):

  1. प्रोटीन को प्राथमिकता दें: हर मील में कम से कम 20-25 ग्राम प्रोटीन सुनिश्चित करें।
  2. मिलेट्स को अपनाएं: गेहूं और चावल की मात्रा कम करें और रागी, ज्वार या बाजरा को शामिल करें।
  3. पर्याप्त नींद: 7-8 घंटे की गहरी नींद हार्मोनल बैलेंस के लिए अनिवार्य है।
  4. नियमित चेकअप: साल में एक बार थायराइड, विटामिन D3 और B12 की जांच ज़रूर करवाएं।

स्वस्थ भारतीय जीवनशैली और वजन नियंत्रण के स्वर्ण नियम

वजन घटाना एक अल्पकालिक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक जीवनशैली होनी चाहिए। महिलाओं में मोटापा: कारण और समाधान को स्थायी रूप से लागू करने के लिए इन आदतों को अपनाएं:

  • धीरे चबाकर खाएं: आपका दिमाग पेट भरने का संकेत देने में 20 मिनट लेता है। धीरे खाने से आप 30% कम कैलोरी खाती हैं।
  • रात का खाना जल्दी: सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले भोजन कर लें।
  • पानी का सही सेवन: प्यास को भूख समझने की गलती न करें। दिन भर में कम से कम 3 लीटर पानी पिएं।
  • मिडिल पाथ: 80/20 नियम अपनाएं – 80% समय स्वस्थ खाएं और 20% समय अपनी पसंद का थोड़ा बहुत आनंद लें।

एनआरआई (NRI) महिलाओं के लिए वेट लॉस टिप्स

विदेश में रहने वाली भारतीय महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती भारतीय सामग्रियों की कमी और ठंडा मौसम होता है।

  • स्मार्ट शॉपिंग: यदि ताजी भारतीय सब्जियां नहीं मिल रही हैं, तो फ्रोजन पालक, गोभी और बीन्स का उपयोग करें।
  • सप्लीमेंट्स: धूप की कमी के कारण विटामिन D की कमी आम है, जो वजन घटाने में बाधा डाल सकती है। डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट लें।
  • देसी स्वाद, विदेशी सामग्री: क्विनोआ (Quinoa) को चावल की जगह और ग्रीक योगर्ट को दही की जगह इस्तेमाल करें।

निष्कर्ष और आगे की राह

महिलाओं में मोटापा: कारण और समाधान पर आधारित यह विस्तृत रिपोर्ट हमें बताती है कि मोटापा केवल बाहर से दिखने वाली चर्बी नहीं है, बल्कि यह हमारे आंतरिक हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य का प्रतिबिंब है। चाहे वह PCOS हो, थायराइड हो या गर्भावस्था के बाद का वजन, हर समस्या का समाधान सही जानकारी और निरंतरता में है।

आसान शब्दों में समझें तो, आपको रातों-रात बदलाव की ज़रूरत नहीं है। अपनी थाली में थोड़ा प्रोटीन बढ़ाना, दिन में 15 मिनट एक्स्ट्रा चलना, या रात को समय पर सोना – ये छोटे कदम ही आपको बड़ी सफलता दिलाएंगे। आप अपनी सेहत की मालिक हैं, और इसे संवारने का सबसे अच्छा समय ‘अभी’ है।

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अस्वीकरण : यह ब्लॉग पोस्ट आपको समग्र रूप से स्वस्थ भोजन विकल्प चुनने में मदद करने के लिए लिखा गया है। इसलिए, सावधान रहें और अपना ख्याल रखें। किसी भी प्रकार का आहार शुरू करने से पहले अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण है। यदि आपको कोई चिंता है, तो शुरू करने से पहले हमेशा डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लें।

1. महिलाओं में मोटापा कम करने का सबसे तेज़ तरीका क्या है?

मोटापा कम करने का सबसे स्थायी और तेज़ तरीका है ‘कैलोरी डेफिसिट’ में रहना, यानी जितनी कैलोरी आप खाती हैं उससे अधिक खर्च करना। इसके साथ ही लो-कार्ब, हाई-प्रोटीन डाइट और नियमित पैदल चलना (30-45 मिनट) सबसे प्रभावी परिणाम देता है।

2. क्या थायराइड के मरीज वास्तव में वजन घटा सकते हैं?

हाँ, थायराइड के मरीज सही दवाओं के साथ मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने वाले आहार (जैसे सेलेनियम और जिंक युक्त फूड्स) और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के जरिए प्रभावी ढंग से वजन घटा सकते हैं।

3. पेट की चर्बी घटाने के सबसे अच्छे घरेलू नुस्खे क्या हैं?

पेट की चर्बी कम करने के लिए सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू-शहद, रात को सोने से पहले त्रिफला चूर्ण का सेवन और दिन भर में जीरा-सौंफ का पानी पीना बहुत फायदेमंद माना जाता है।

4. क्या पीसीओएस (PCOS) में वजन घटाने के लिए चावल पूरी तरह बंद करना ज़रूरी है?

नहीं, चावल को पूरी तरह बंद करने की ज़रूरत नहीं है। आप सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस या लाल चावल (Red Rice) कम मात्रा में ले सकती हैं। इसे हमेशा दाल और सब्जियों के साथ खाएं ताकि फाइबर की मात्रा बनी रहे।

5. क्या बिना जिम जाए महिलाएं वजन कम कर सकती हैं?

बिल्कुल! घर पर की जाने वाली गतिविधियों जैसे तेज चलना, सीढ़ियां चढ़ना, योगासन और घर के काम (NEAT) के साथ संतुलित आहार का पालन करके आप जिम जाए बिना भी वजन कम कर सकती हैं।

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