मोटापा कब लगता है और कब खत्म होता है

क्या आपने कभी आईने के सामने खड़े होकर यह सोचा है कि आपके शरीर में वह अतिरिक्त वजन आखिर कब और कैसे जमा होना शुरू हुआ? अक्सर हम अपनी व्यस्त जीवनशैली में इतने उलझ जाते हैं कि हमें यह पता ही नहीं चलता कि कब हमारे पसंदीदा कपड़े धीरे-धीरे तंग होने लगे और कब सीढ़ियां चढ़ते समय हमारी सांस फूलने लगी। मोटापा कब लगता है और कब खत्म होता है, यह केवल वजन के बढ़ने या घटने की बात नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के अंदर चल रहे जटिल मेटाबॉलिक और हार्मोनल बदलावों की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है।

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मोटापा तब लगता है जब शरीर की ऊर्जा खपत से अधिक कैलोरी का सेवन किया जाता है, जिससे अतिरिक्त ऊर्जा वसा कोशिकाओं (Adipocytes) में जमा होने लगती है । मोटापा तब खत्म होता है जब कैलोरी डेफिसिट की स्थिति में शरीर संचित वसा को ऊर्जा के लिए तोड़ता है, जिसका 84% हिस्सा सांस (CO2) के जरिए और 16% हिस्सा पसीने या मूत्र (H2O) के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है ।

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मोटापा बढ़ने की वैज्ञानिक प्रक्रिया और शरीर की जैविक प्रतिक्रिया

मोटापे को समझने के लिए सबसे पहले हमें ऊर्जा संतुलन (Energy Balance) के सिद्धांत को समझना होगा। हमारे शरीर को जीवित रहने, सांस लेने और दैनिक कार्यों को पूरा करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो हमें भोजन से मिलने वाली कैलोरी के माध्यम से प्राप्त होती है । जब यह ऊर्जा संतुलन सकारात्मक (Positive Energy Balance) हो जाता है, तो वजन बढ़ना शुरू होता है ।

ऊर्जा अधिशेष और वसा संचय का तंत्र

जब हम अपनी शारीरिक गतिविधियों और बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) से अधिक भोजन लेते हैं, तो हमारा शरीर उस अतिरिक्त ऊर्जा को नष्ट नहीं करता। इसके बजाय, इंसुलिन नामक हार्मोन इस अतिरिक्त ग्लूकोज को वसा के रूप में संचित करने का संकेत देता है । यह प्रक्रिया मुख्य रूप से ‘एडिपोसाइट्स’ (Adipocytes) नामक कोशिकाओं में होती है। इन कोशिकाओं की विशेषता यह है कि वजन बढ़ने पर इनकी संख्या नहीं बढ़ती, बल्कि इनका आकार गुब्बारे की तरह फूलने लगता है ।

मोटापा बढ़ने की शुरुआत तब होती है जब ये कोशिकाएं अपनी सामान्य क्षमता से अधिक फैल जाती हैं। भारतीय संदर्भ में, विशेष रूप से शहरी आबादी में, यह प्रक्रिया अक्सर 30 से 40 की उम्र के बीच तेज हो जाती है, जिसे अक्सर हार्मोनल बदलाव और धीमी चयापचय दर से जोड़ा जाता है ।

वजन बढ़ने के चरणशारीरिक प्रक्रियाप्रमुख हार्मोन
प्रारंभिक चरणरक्त शर्करा में वृद्धि और अतिरिक्त कैलोरी का संचयइंसुलिन (Insulin)
संचय चरणएडिपोसाइट्स का विस्तार और वसा ऊतकों का निर्माणलेप्टिन (Leptin)
जटिल चरणक्रोनिक सूजन (Inflammation) और इंसुलिन रेजिस्टेंसकोर्टिसोल (Cortisol)

मेटाबॉलिज्म का धीमा होना और वजन में वृद्धि

मेटाबॉलिज्म वह इंजन है जो शरीर में कैलोरी जलाता है। जब मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, तो शरीर कैलोरी को ऊर्जा में बदलने के बजाय वसा के रूप में सहेजने को प्राथमिकता देता है । इसका एक बड़ा कारण उम्र का बढ़ना भी है। शोध बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ ऊर्जा व्यय कम हो जाता है, जिससे स्थिर वजन बनाए रखने के लिए भी कम कैलोरी की आवश्यकता होती है ।

यदि कोई व्यक्ति अपनी उम्र के अनुसार कैलोरी का सेवन कम नहीं करता है, तो उनका वजन धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो जाता है। भारतीय महिलाओं में, विशेष रूप से गृहिणियों में, यह समस्या अधिक देखी जाती है क्योंकि घर के कामों के बावजूद उनकी शारीरिक सक्रियता एक व्यवस्थित व्यायाम की तुलना में कम कैलोरी जलाती है ।

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मोटापा कब लगता है: जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों का विश्लेषण

मोटापा लगने की शुरुआत केवल अधिक खाने से नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कई सूक्ष्म सामाजिक और व्यवहारिक कारक होते हैं। आधुनिक भारतीय समाज में, भोजन की उपलब्धता और शारीरिक निष्क्रियता के बीच का बढ़ता अंतर इस महामारी का मुख्य कारण बन गया है ।

अस्वास्थ्यकारी आहार और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) का प्रभाव

मोटापा कब लगता है, इसका सीधा संबंध हमारे द्वारा चुने गए भोजन की गुणवत्ता से है। भारत में पिछले दो दशकों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) की खपत में जबरदस्त वृद्धि हुई है । ये खाद्य पदार्थ, जिनमें अत्यधिक चीनी, नमक और ट्रांस-फैट होता है, सीधे तौर पर मोटापे को बढ़ावा देते हैं।

  • चीनी युक्त पेय: कोला, सोडा और डिब्बाबंद जूस रक्त में इंसुलिन के स्तर को अचानक बढ़ा देते हैं, जिससे शरीर वसा भंडारण मोड में चला जाता है ।
  • रिफाइंड कार्ब्स: मैदा, सफेद ब्रेड और बिस्कुट में फाइबर की कमी होती है, जिससे वे जल्दी पच जाते हैं और बार-बार भूख लगने का कारण बनते हैं ।

गतिहीन जीवनशैली और तकनीक का हस्तक्षेप

मोटापा बढ़ने की शुरुआत तब होती है जब हमारी दैनिक गतिविधियों में तकनीक का हस्तक्षेप बढ़ जाता है। लिफ्ट, कार, रिमोट कंट्रोल और ऑनलाइन शॉपिंग जैसी सुविधाओं ने हमें अपनी जगह से हिलने की आवश्यकता को कम कर दिया है । डेस्क जॉब करने वाले प्रोफेशनल्स का अधिकांश समय बैठकर बीतता है, जिससे ‘सिटिंग डिजीज’ का खतरा बढ़ जाता है ।

एक अध्ययन के अनुसार, शारीरिक रूप से सक्रिय लोगों की तुलना में बैठे रहने वाले लोग काफी कम कैलोरी का उपयोग करते हैं । यदि वे अपने आहार को इस कम ऊर्जा व्यय के अनुसार समायोजित नहीं करते हैं, तो उनका वजन बढ़ना अपरिहार्य हो जाता है ।

पारिवारिक और आनुवंशिक क्लस्टरिंग (Household Clustering)

भारत में मोटापे का एक अनूठा पहलू यह है कि यह अक्सर पूरे परिवार को एक साथ प्रभावित करता है। ICMR-NICPR के शोध से पता चला है कि भारत में हर पांच में से एक घर के सभी वयस्क सदस्य ओवरवेट या मोटे हैं । यह ‘फैमिली क्लस्टरिंग’ इस तथ्य की ओर इशारा करती है कि मोटापा केवल व्यक्तिगत पसंद नहीं, बल्कि एक साझा जीवनशैली की समस्या है ।

क्षेत्रमोटापे का प्रभाव (NFHS-5)मुख्य कारण
शहरी भारतउच्च (लगभग 44%)गतिहीन नौकरी, फास्ट फूड की सुलभता
ग्रामीण भारतमध्यम (लगभग 36%)बदलती खान-पान की आदतें, कृषि मशीनीकरण
दक्षिण भारतसर्वाधिक (46.5%)उच्च कार्ब आहार और शहरीकरण

मोटापा बढ़ने की शुरुआत कब होती है, इसे पहचानने के लिए परिवारों को अपने सामूहिक भोजन और मनोरंजन की आदतों (जैसे टीवी देखते समय स्नैक्स खाना) का विश्लेषण करना चाहिए ।

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चिकित्सा स्थितियों और हार्मोन का जटिल जाल

मोटापा कब लगता है, इस सवाल का जवाब अक्सर हमारी अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine Glands) के पास होता है। पीसीओएस (PCOS), थायराइड और डायबिटीज जैसी बीमारियां न केवल मोटापे का परिणाम हैं, बल्कि वे इसके कारण भी बन सकती हैं ।

पीसीओएस (PCOS) और मोटापा नियंत्रण

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन का एक प्रमुख कारण है, जो सीधे तौर पर वजन बढ़ाने से जुड़ा है। इसमें शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ पैदा होता है । इसके परिणामस्वरूप, शरीर अधिक इंसुलिन बनाता है, जो पेट के आसपास वसा जमा करने का संकेत देता है ।

PCOS में मोटापा दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों ही जीवनशैली में बदलाव पर जोर देते हैं। दालचीनी और मेथी जैसी चीजें इंसुलिन संवेदनशीलता को सुधारने में मदद कर सकती हैं ।

थायराइड और मेटाबॉलिक मंदी

थायराइड हार्मोन हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करते हैं। हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) की स्थिति में, थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती, जिससे शरीर की कैलोरी जलाने की क्षमता काफी कम हो जाती है । थायराइड में वजन घटाने के टिप्स में आयोडीन और सेलेनियम युक्त संतुलित आहार और नियमित व्यायाम शामिल है ताकि मेटाबॉलिक दर को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जा सके ।

तनाव और नींद की कमी का योगदान

तनाव हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ सीधे तौर पर मोटापे से जुड़ा है। जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारा शरीर ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में होता है और ऊर्जा बचाने के लिए वसा संचय को बढ़ाता है 1। इसी तरह, नींद की कमी लेप्टिन (तृप्ति हार्मोन) को कम करती है और घ्रेलिन (भूख हार्मोन) को बढ़ाती है, जिससे रात में क्रेविंग्स बढ़ती हैं और वजन बढ़ना शुरू हो जाता है ।

भारत में मोटापे के आंकड़े: एक अलार्म बज रहा है

NFHS-5 (2019-21) के आंकड़े भारत के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करते हैं। मोटापे की व्यापकता पिछले 15 वर्षों में लगभग दोगुनी हो गई है ।

  • वयस्कों में वृद्धि: महिलाओं में मोटापे की व्यापकता 12.6% से बढ़कर 24% हो गई है, जबकि पुरुषों में यह 9.3% से बढ़कर 22.9% हो गई है 。
  • बचपन का मोटापा: 5 साल से कम उम्र के बच्चों में मोटापे की दर 127% की वृद्धि के साथ चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है ।
  • आर्थिक बोझ: मोटापे से संबंधित बीमारियों का इलाज भारत की जीडीपी का लगभग 1% खा जाता है, जिसके 2060 तक बढ़कर 2.5% होने का अनुमान है ।

ये सांख्यिकी दर्शाती हैं कि मोटापा बढ़ने की शुरुआत अब कम उम्र में ही हो रही है, जिससे भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोगों का बोझ बढ़ने वाला है ।

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मोटापा खत्म होने के लक्षण: जब शरीर वसा जलाना शुरू करता है

मोटापा कब खत्म होता है, यह जानना उन लोगों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है जो अपनी वजन घटाने की यात्रा शुरू कर चुके हैं। वजन कम होना केवल वजन मशीन के कांटे का नीचे जाना नहीं है, बल्कि शरीर में होने वाले कई सकारात्मक बदलावों का समूह है ।

वसा ऑक्सीकरण का विज्ञान (The Chemistry of Fat Loss)

वैज्ञानिक रूप से, वसा शरीर को पसीने या मल के माध्यम से नहीं छोड़ती है, जैसा कि अक्सर माना जाता है। वसा का ऑक्सीकरण एक रासायनिक प्रक्रिया है:

  1. संचित ट्राइग्लिसराइड्स फैटी एसिड और ग्लिसरॉल में टूटते हैं 。
  2. ये घटक ऊर्जा उत्पादन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और पानी (H2O) में परिवर्तित हो जाते हैं ।
  3. आश्चर्यजनक रूप से, 84% वसा हानि हमारे फेफड़ों के माध्यम से सांस छोड़ने (Exhalation) के रूप में होती है 。

इसका अर्थ है कि मोटापा खत्म करने के लक्षण तब दिखाई देते हैं जब आपकी श्वसन दक्षता सुधरती है और आप शारीरिक गतिविधियों के दौरान अधिक CO2 बाहर निकालते हैं ।

गैर-पैमाना जीत (Non-Scale Victories – NSVs)

अक्सर वजन कम करने के दौरान ‘वेट लॉस प्लैट्यू’ (Plateau) आता है, जहाँ स्केल पर वजन नहीं बदलता, लेकिन शरीर का आकार बदल रहा होता है । मोटापा खत्म होने के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • कपड़ों की फिटिंग: आपके कपड़े ढीले होने लगते हैं, जो इंच लॉस का संकेत है। यह दर्शाता है कि आप वसा खो रहे हैं और मांसपेशियां बना रहे हैं ।
  • ऊर्जा के स्तर में वृद्धि: दिन भर थकान कम महसूस होना और सुबह फ्रेश उठना मेटाबॉलिक सुधार का लक्षण है 24
  • बेहतर नींद: खर्राटे कम होना और गहरी नींद आना वजन घटने का एक बड़ा संकेत है, क्योंकि गले के आसपास की चर्बी कम होने से सांस लेना आसान हो जाता है ।
  • स्टैमिना में सुधार: सीढ़ियां चढ़ते समय सांस का न फूलना इस बात का प्रमाण है कि आपके हृदय और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ गई है ।
लक्षणवैज्ञानिक कारण
चेहरे की चमक और साफ त्वचाविषाक्त पदार्थों का बाहर निकलना और बेहतर हाइड्रेशन
जोड़ों के दर्द में कमीहड्डियों और जोड़ों पर भार का कम होना
मानसिक स्पष्टतारक्त शर्करा के स्तर में स्थिरता और सूजन में कमी
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मोटापा कम करने के उपाय: एक व्यवस्थित दृष्टिकोण

मोटापा खत्म करने की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए आहार, व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन आवश्यक है। भारतीय जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए, यहाँ कुछ प्रभावी तरीके दिए गए हैं:

कैलोरी डेफिसिट क्या है और यह क्यों जरूरी है?

मोटापा खत्म करने का सुनहरा नियम है कैलोरी डेफिसिट। इसका सीधा अर्थ है कि आप जितनी कैलोरी जला रहे हैं, उससे कम कैलोरी का सेवन करें 2। हालांकि, बहुत अधिक कैलोरी कटौती हानिकारक हो सकती है क्योंकि यह मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है और मांसपेशियों को नुकसान पहुँचाती है। एक स्वस्थ कैलोरी डेफिसिट प्रतिदिन 300 से 500 कैलोरी का होना चाहिए।

भारतीय डाइट चार्ट और पोषण संबंधी सुधार

ICMR 2024 की नई गाइडलाइन्स के अनुसार, भारतीयों को अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट कम करने और प्रोटीन व फाइबर बढ़ाने की आवश्यकता है ।

  • सब्जियों का महत्व: प्रतिदिन कम से कम 400 ग्राम सब्जियां खाएं ताकि पर्याप्त माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिल सकें ।
  • प्रोटीन स्रोत: दालें, पनीर, अंडे का सफेद हिस्सा, और सोयाबीन मांसपेशियों के रखरखाव के लिए आवश्यक हैं ।
  • मोटा अनाज (Millets): रागी, बाजरा और ज्वार जैसे मोटे अनाज सफेद चावल की तुलना में अधिक फाइबर देते हैं और भूख को नियंत्रित रखते हैं ।

मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के तरीके

मेटाबॉलिज्म को केवल दवाओं से नहीं, बल्कि सही आदतों से बढ़ाया जा सकता है:

  1. शक्ति प्रशिक्षण (Strength Training): मांसपेशियां आराम के दौरान भी वसा की तुलना में अधिक कैलोरी जलाती हैं।
  2. पर्याप्त हाइड्रेशन: पानी मेटाबॉलिज्म और डिटॉक्सिफिकेशन के लिए महत्वपूर्ण है। कम पानी पीने से शरीर में फैट जमा होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है ।
  3. NEAT (Non-Exercise Activity Thermogenesis): फोन पर बात करते समय टहलना, सीढ़ियों का उपयोग करना और घर के छोटे-छोटे काम करना भी कैलोरी जलाने में मदद करता है ।

विशेष स्थितियां: PCOD, थायराइड और हाई BP में सावधानी

मोटापा दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय और आधुनिक चिकित्सा दोनों ही इन स्थितियों में सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

  • PCOD/PCOS: इसमें लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स आहार पर ध्यान दें। सफेद ब्रेड की जगह ओट्स या दलिया लें ।
  • थायराइड: गोइट्रोजेनिक खाद्य पदार्थों (जैसे कच्ची पत्तागोभी या फूलगोभी) को सीमित मात्रा में लें और डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवा नियमित रूप से लें ।
  • हाई BP और हृदय रोग: नमक का सेवन कम करें (प्रतिदिन 5 ग्राम से कम) और पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थों जैसे केला और पालक को शामिल करें ।

घरेलू और प्राकृतिक समाधान

भारतीय रसोई में कई ऐसी चीजें हैं जो मोटापा खत्म करने की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं:

  • मेथी और दालचीनी: ये रक्त शर्करा को नियंत्रित करने और इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद करते हैं ।
  • त्रिफला और चूर्ण: आयुर्वेद के अनुसार, ये पाचन अग्नि को प्रज्वलित करते हैं और शरीर से विषाक्त पदार्थों (अमा) को बाहर निकालते हैं ।
  • ग्रीन टी और हर्बल काढ़ा: ये एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं और फैट ऑक्सीकरण में मदद कर सकते हैं ।

निष्कर्ष: एक स्वस्थ भविष्य की ओर कदम

मोटापा कब लगता है और कब खत्म होता है, इसे समझना आपके स्वास्थ्य की बागडोर अपने हाथ में लेने जैसा है। मोटापा लगना एक धीमी प्रक्रिया है जो हमारे अनजाने में किए गए फैसलों का परिणाम होती है, लेकिन इसका अंत हमारे सचेत प्रयासों से संभव है। जैसा कि हमने देखा, 84% वसा हमारे सांसों के जरिए निकलती है, जो इस बात का प्रतीक है कि हर वह कदम जो हमारी सांसों को तेज करता है, हमें मोटापे से मुक्ति की ओर ले जाता है ।

मुझे पता है कि व्यस्त प्रोफेशनल्स और गृहिणियों के लिए समय निकालना आसान नहीं होता, लेकिन छोटे बदलाव ही बड़े परिणाम लाते हैं। चलिए इसे आसान बनाते हैं—आज से ही अपने भोजन में एक अतिरिक्त फल शामिल करें और 15 मिनट की तेज सैर से शुरुआत करें। आपका शरीर इन बदलावों को पहचानेगा और धीरे-धीरे आप उन ‘नॉन-स्केल विक्ट्रीज’ को महसूस करने लगेंगे ।

याद रखें, वजन घटाना कोई सजा नहीं, बल्कि अपने शरीर का सम्मान करने का एक तरीका है। यदि आप अपनी मेडिकल कंडीशन के अनुसार एक सटीक और वैज्ञानिक डाइट प्लान चाहते हैं, तो संकोच न करें।

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अस्वीकरण : यह ब्लॉग पोस्ट आपको समग्र रूप से स्वस्थ भोजन विकल्प चुनने में मदद करने के लिए लिखा गया है। इसलिए, सावधान रहें और अपना ख्याल रखें। किसी भी प्रकार का आहार शुरू करने से पहले अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण है। यदि आपको कोई चिंता है, तो शुरू करने से पहले हमेशा डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लें।

FAQs: मोटापे से जुड़े प्रमुख सवाल और जवाब

1. मोटापा बढ़ने की शुरुआत कब होती है और इसके मुख्य संकेत क्या हैं?

मोटापा बढ़ने की शुरुआत तब होती है जब कैलोरी का सेवन खर्च से अधिक हो जाता है। इसके शुरुआती संकेतों में कपड़ों का कमर से टाइट होना, सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, बार-बार थकान महसूस होना और $BMI$ का 25 से ऊपर जाना शामिल है ।

2. क्या केवल डाइटिंग से मोटापा खत्म हो सकता है?

केवल डाइटिंग से वजन कम हो सकता है, लेकिन इससे मांसपेशियों का नुकसान भी हो सकता है, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। एक स्थायी समाधान के लिए आहार परिवर्तन को व्यायाम (विशेष रूप से शक्ति प्रशिक्षण) के साथ जोड़ना अनिवार्य है।

3. वसा शरीर से बाहर कैसे निकलती है?

वसा का अधिकांश हिस्सा (84%) कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में फेफड़ों के माध्यम से बाहर निकलता है जब हम सांस छोड़ते हैं। शेष 16% पानी के रूप में पसीने, मूत्र और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के माध्यम से बाहर निकलता है ।

4. पीसीओएस और मोटापा नियंत्रण के लिए सबसे अच्छा तरीका क्या है?

पीसीओएस में वजन घटाने के लिए लो-ग्लाइसेमिक आहार (High Fiber) और इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने वाले व्यायाम सबसे प्रभावी हैं। 5-10% वजन घटाने से भी ओव्यूलेशन और हार्मोनल संतुलन में सुधार हो सकता है ।

5. क्या रात को देर से खाना खाने से मोटापा बढ़ता है?

रात को देर से खाना सीधे तौर पर वजन नहीं बढ़ाता, लेकिन देर रात खाने वाले अक्सर उच्च-कैलोरी स्नैक्स चुनते हैं और उनकी नींद प्रभावित होती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से वजन बढ़ाने वाले हार्मोन को सक्रिय करता है ।

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